Friday, 27 December 2019

kar jama karna desh ko vikas ki gati dena hai

   समाज में दो तरह के लोग होते है। एक वे,जो कर अदा करने लायक आय होने पर स्वेच्छा से  ईमानदारी के साथ सर्कार को कर अदा कर देते है और दूसरे वे , जो  कमाई तो जायज़ -नाजायज अंधाधुंध करते है , पर नियम के तरह कर अदा करने से कतराते है।  यह मनोवृत्ति उचित नहीं है।
    देश के विकास का कार्य जनता द्वारा प्राप्त कर से ही पूरा होता है।  चिकित्सा ,परिवहन तथा जनता की सहायतार्थ शुरू किए जाने वाले सारे कार्य जनता से प्राप्त कर से ही पुरे होते है।  जिस देश में आय करने वाले सभी लोग ईमानदारी और स्वेच्छा से कार्य सुचारु रूप से पुरे होते है और सामान्य जनता को उसका पूरा पूरा मिलता है।
     यदि कोई व्यक्ति यह सोचता हो की सभी लोग तो कर अदा करते है , उसके अकेले कर ऐडा न करने या काम कर का भुगतान करने से क्या फर्क पड़ेगा, तो ऐसा सोचने वालो की संख्या अनगिनत हो सकती है।  इस तरह कारन पैसे की आभाव में सर्कार की अनेक योजनाए अटकी रह जाती है। इसीलिए कर योग्य आय पर ईमानदारी से कर जमा करना प्रत्येक नागरिक का कर्त्तव्य है।  कर ऐडा कर हम अपनी ही सहायता करते है।  कर जमा करने से ही विकास को गति मिलती है।
     अगर हम कर नहीं देते तो उसमे हमारा ही नुकसान है फिर हम लोग सर्कार के नाम से चिल्लाते है। अगर हम कर नहीं देते तो जो गांव है वह जहा अस्पताल नहीं है ,जहा स्कूल नहीं है , जहा रस्ते नहीं है  उस गांव में कुछ नहीं बनेगा। क्योकि जो सर्कार काम करते है वो सिर्फ हमारे पैसो से होते है और वो हमरी भलाई के लिए करते है। आपसे बस यही निवेदन है की कर देते जाओ। 

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